बिहार: क्या पदाधिकारी आपको भी एक से अधिक खंडो में मांगी गई जानकारी देने से इंकार किया है!

आरटीआई एक्सपर्ट ऋषिकेश सारस्वत। 

क्या आपको भी किसी लोक सूचना पदाधिकारी ने एक विषय से सम्बंधित अनेक  प्रश्न पूछने पर आपके आवेदन को निरस्त कर दिया गया है तो यह आर्टिकल आपके लिए है। 

आरटीआई एक्सपर्ट: ऋषिकेश सारस्वत 
जी हाँ, मेरे पास बहुत सारे ऐसे केसेज आते है जिसमें एक विषय से सम्बंधित अनेक प्रश्न पूछने पर लोक सूचना पदाधिकारी आवेदन को निरस्त  कर देता है अर्थात अवैध घोषित  कर देता है। जो सरासर नियम का उल्लंघन है आप इसके लिए अपील में जा सकते है. सर्वप्रथम हम यह जानेंगे कि एक एक विषय से सम्बंधित सुचना का तात्पर्य क्या है ? 
एक विषय से सम्बंधित सूचना को बिहार सरकार ने 26 जुलाई 2010 को एक नोटिफिकेशन जारी कर परिभाषित किया था। यहाँ पर  बिहार सरकार के उस पत्र को हु-ब-हु लिखेंगे।

बिहार सरकार, सामान्य प्रशासन विभाग, पटना (पत्र संख्या-8/सू.अ.-10-15/2010 सा. 7199, दिनांक 26-07-2010) . प्रेषक, संयुक्त सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना।  

विषय- सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत एक विषय से सम्बंधित सूचना मांगने के सम्बन्ध में। 

    उपर्युक्त विषय के सम्बन्ध में आपका ध्यान आकृष्ट करते हुए निदेशानुसार कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आवेदकों द्वारा मांगी जाने वाली 'सूचना' का आकार एवं प्रकार पूर्ण रूप से अधिनियम के अंतर्गत परिभाषित नहीं है. भारत सरकार द्वारा निर्गत 'गाइड' में सूचना को संक्षिप्त एवं विशिष्ट रूप  से परिभाषित करते हुए उसे एक विषय से सम्बंधित बतलाया गया है। 

2. उक्त परिप्रेक्ष्य में बिहार सूचना का अधिकार (संसोधन) नियमावली, 2009 के नियम 4 में सूचना को एक विषय से सम्बंधित एक सौ पचास शब्दों के अन्दर निम् प्रकार से निरुपित किया गया है:- 

"3क. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अधीन सूचना के लिए लिखित अनुरोध एक मात्र विषय से सम्बंधित होगा और यह सामान्यतया एक सौ पचास शब्दों से अधिक नहीं होगा। यदि कोई आवेदक एक से अधिक विषयों पर सूचना चाहता हो तो वह अलग-अलग आवेदन सक्षम लोक सूचना पदाहिकारी के समक्ष दे सकता है। 
          परन्तु यह कि एक से अधिक विषयों से सम्बंधित सूचना के लिए अनुरोध किया जाता है तो लोक सूचना पदाधिकारी प्रथम विषय मात्र से सूचना देगा और आवेदक को परामर्श देगा कि अन्य विषयों में से प्रत्येक के सम्बन्ध में अलग-अलग आवेदन करे। "

3. सम्प्रति 'सूचना' के विषय के सम्बन्ध में यह स्पष्ट किया जाता है कि सूचना का विषय से तात्पर्य अनुकम्पा, प्रोन्नति, नियुक्ति, निश्चित विकास योजना आदि अलग-अलग विषयों से है। यदि विभिन्न कंडिकाओं में मांगी गई सूचना का विषय एक ही लोक प्राधिकार से सम्बंधित हो तो उसे आवेदक को उपलब्ध कराया जाय । उक्त स्पष्टीकरण में मांगी गई सूचना में शब्दों की संख्या की सीमा एक सौ पचास बनी रहेगी। 

कृपया इसे अधीनस्थों को अपने स्तर से अवगत कराने का कष्ट किया जाय। 

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